सोमवार, 15 मई 2017

ईबादत

फ़ासले चाहें हों दरमियान जितने,
मेरे हर सज़दे में अब तेरी ही ईबादत होगी।

सज़्र रातों को तेरे ख़्वाबों में,
और सहरा1 में तेरी यादों में।
ये इंतज़ार कि आदत भी क्या मोहब्बत होगी॥

फ़ासले चाहें हों दरमियान जितने,
मेरे हर सज़दे में अब तेरी ही ईबादत होगी।

तेरे चेहरे कि चमक़,
जैसे चँदा-ओ-सितारा-ए-फ़लक़2
ये नूर-ए-इलाही सी दौलत होगी॥

फ़ासले चाहें हों दरमियान जितने,
मेरे हर सज़दे में अब तेरी ही ईबादत होगी।

दोनों मिल जाएँ कहीं,
जैसे दरिया के दो किनारें हैं हमीं।
ये जज़्बात कि बगिया भी खिलेगी भी कभी॥

फ़ासले चाहें हों दरमियान जितने,
मेरे हर सज़दे में अब तेरी ही ईबादत होगी।

1. सहरा = रेगिस्तान, 2. फ़लक़ = आसमान

#PatelVsPatel #Mrs.&Mr.Patel


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faasle chahe hon darmiyaan jitne
mere har sazde mein ab teri hi ibadat hogi.

sazr raaton ko tere khwabon mein
aur sahara mein teri yaadon mein,
ye intezaar ki aadat bhi kya mohabbat hogi.

faasle chahe hon darmiyaan jitne
mere har sazde mein ab teri hi ibadat hogi.

tere chehre ki chamak
jaise chanda-o-sitara-e-phalak,
ye noor-e-ilahi si daulat hogi.

dono mil jayein kahin
jaise dariya ke do kinare hain hamin,
ye jazbaat ki bagiya bhi khilegi kabhi.

faasle chahe hon darmiyaan jitne
mere har sazde mein ab teri hi ibadat hogi.

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